- ₹250.00
- by
- Book: The Bloody Monsoon
- Paperback: 206pages
- Publisher: Gradias Publishing House
- Language: Hindi
- ISBN-13: 978-81-69082-94-5
- Product Dimensions: 22 x 14 x 2 cm
द ब्लडी मानसून— जब सत्ता की बिसात भीगने लगती है
डेविड फ्रांसिस सीरीज़ की छठी कड़ी द ब्लडी मानसून अब पाठकों के सामने है। यह उपन्यास मुंबई के अंडरवर्ल्ड के उस दौर को पकड़ता है, जब ऊपर से सब कुछ स्थिर दिखाई देता है, लेकिन भीतर सत्ता की जमीन खिसकने लगती है।
मुंबई का अंडरवर्ल्ड लंबे समय से एक स्थापित ढांचे पर चल रहा है। नियम तय हैं, सीमाएं तय हैं, और हर खिलाड़ी अपनी जगह जानता है। लेकिन इस बार खेल अलग है। शहर में एक ऐसा गुप्त सिलसिला शुरू होता है जो सीधे टकराव से नहीं, दबाव से काम करता है। कुछ प्रभावशाली लोग अचानक खामोश हो जाते हैं। कुछ फैसले बिना वजह बदल जाते हैं। और हवा में एक अनकहा डर तैरने लगता है।
कौन है जो परछाइयों में बैठकर धागे खींच रहा है?
क्यों यह खेल खुले मैदान की बजाय बंद कमरों में खेला जा रहा है?
इसी बीच डेविड फ्रांसिस मुंबई लौटता है। उसका इरादा किसी बड़े संघर्ष में कूदने का नहीं था। लेकिन परिस्थितियां उसे एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा करती हैं जहां पीछे हटना संभव नहीं। एक निजी आघात इस पूरी कहानी को उसके लिए व्यक्तिगत बना देता है। अब यह सिर्फ जांच का मामला नहीं, एक अधूरा हिसाब है।
जैसे-जैसे डेविड सच्चाई की परतें खोलता है, उसे एहसास होता है कि यह संघर्ष सीधा नहीं है। यहां हर व्यक्ति के अपने मकसद हैं। दोस्ती और स्वार्थ की रेखाएं धुंधली हैं। अंडरवर्ल्ड के भीतर ही बदलाव की आहट है। जो साम्राज्य अटूट लगता था, उसकी दीवारों में महीन दरारें पड़ चुकी हैं।
द ब्लडी मानसून की खासियत इसकी गति और संतुलन है। कहानी व्यक्तिगत भावनाओं और संगठित अपराध की संरचना— दोनों को साथ लेकर चलती है। डेविड का संघर्ष बाहरी दुश्मनों से जितना है, उतना ही परिस्थितियों और फैसलों से भी। हर कदम उसे जोखिम के करीब ले जाता है, और हर खुलासा कहानी को एक नए मोड़ पर पहुंचा देता है।
यह उपन्यास उन पाठकों के लिए है जो तेज रफ्तार, सस्पेंस से भरपूर और चरित्र-प्रधान हिंदी क्राइम फिक्शन पढ़ना पसंद करते हैं। यहां अनावश्यक शोर नहीं, बल्कि ठोस घटनाएं हैं। यहां दिखावे की चमक नहीं, बल्कि सत्ता के असली समीकरण हैं।
जब शहर पर मानसून आता है, तो सिर्फ मौसम नहीं बदलता— हालात भी बदलते हैं।
ब्लडी मानसून उसी बदलाव की कहानी है।
पढ़िए और जानिए— जब परछाइयों का खेल खुलता है, तो कौन टिक पाता है।
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